आज का शब्द: मरकत और हरिवंशराय बच्चन की कविता- है यह पतझड़ की शाम, सखे!

आज का शब्द: मरकत और हरिवंशराय बच्चन की कविता- है यह पतझड़ की शाम, सखे!

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